Government of Uttar Pradesh
Manual on training and dissemination1

4. मछली पालन हेतु सुविधायें :-

ग्रामीण अंचलों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने हेतु प्रवेश के सभी जनपदों में मत्स्य पालक विकास अभिकरण स्थापित किये गये हैं। मत्स्य पालक के पास यदि पट्टे का अथवा निजी पुराना तालाब है अथवा वह निजी भूमि पर नये तालाब के निर्माण हेतु इच्छुक है तथा मछली पालन करना चाहता है तो मत्स्य पालक विकास अभिकरण के द्वारा अधोलिखित सुविधाएं सुलभ कराये जाने की व्यवस्था है। मत्स्य पालकों को चाहिए कि वे सुविधाएं प्राप्त करने के लिए जनपद स्तर पर मत्स्य पालक विकास अभिकरण में मुख्य कार्यकारी अधिकारी से समपर्क करें।

4.1 तालाब सुधार :-

पुराने तालाब के सुधार के लिए रू० 60,000/- प्रति हेक्टेयर की सीमा तक बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है जिस पर सामान्य व्यक्तियों को 20% अर्थात रू० 12,000/- तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के मत्स्य पालकों के लिए 25% अर्थात् रू० 15,000/- तक शासकीय अनुदान किया जाता है।

4.2 नये तालाब का निर्माण :-

मत्स्य पालक की निजी भूमि पर नये तालाब के निर्माण हेतु जिसमें उपयुक्त जाली सहित इनलेट व आउटलेट तथा शैलो ट्यूबवेल आदि व्यवस्थायें सम्मिलित हैं, रू० 2.00 लाख प्रति हेक्टर तक बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इस ऋण पर सामान्य व्यक्तियों के लिए 20% अर्थात रू० 40,000/- एवं अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्तियों के लिए 25% अर्थात रू० 50,000/- की सीमा तक शासकीय अनुदान सुलभ कराया जाता है।

4.3 उत्पादन निवेशों हेतु सुविधा :-

तालाब सुधार अथवा निर्माण के बाद मत्स्य पालन प्रारम्भ करने के लिए उर्वरक, मत्स्य बीज, पूरक आहार आदि आवश्यक हैं। निर्धारित मात्रा में उर्वरकों (गोबर की खाद तथा एन०पी०के० खाद) के प्रयोग से तालाब में उपयुक्त जलीय वातावरण और प्लांकटान जोकि मछली का प्राकृतिक भोजन है, उत्पन्न होता है। संचति मत्स्य बीज की बढ़ोत्तरी के लिए पूरक आहार की व्यवस्था आवश्यक है। मत्स्य पालन प्रारम्भ करने के लिए पहले वर्ष में उत्पादन निवेशों हेतु रू० 30,000/- प्रति हेक्टेयर तक बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है जिस पर सामान्य श्रेणी के व्यक्तियों के लिए 20% अर्थात रू० 6,000/- व अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्तियों के लिए 25% अर्थात रू० 7,500/- तक अनुदान दिया जाता है।

4.4 समन्वित मत्स्य पालन (इन्टीग्रेटेड फिश फार्मिंग) :-

मछली के साथ-साथ यदि बत्तख, मुर्गी, शूकर आदि का भी पालन किया जाय अर्था इन्टीग्रेटेउ फिश फार्मिंग अपनायी जाय तो आय में और भी अधिक वृद्धि सम्भव हो सकती है। इन्टीग्रेटेड फिश फार्मिंग से सम्बन्धित रू० 80,000/- प्रति हेक्टेयर परियोजना लागत पर सामान्य श्रेणी के व्यक्तियों के लिए 20% अर्थात रू० 16,000/- तथा अनुसूचित जाति/ जनजाति के लोगों को 25% अर्थात् रू० 20,000/- अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।

4.5 ऐरेटर/पम्प की सुविधा :-

तालाब में ऐरेटर की व्यवस्था के फलस्वरूप पानी में वांछित घुलित आक्सीजन उपलब्ध रहती है जो कि मछलियों के जीवन के लिये अत्यधिक आवश्यक है। अधिक मत्स्य उत्पादन प्राप्त करने के लिए तालाब में ऐरेटर की विशेष उपयोगिता है। ऐसे प्रगतिशील मत्स्य पालकों जिन्होंने 3000 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष तक मत्स्य उत्पादन का स्तर प्राप्त कर लिया है तथा उनमें इस स्तर को और भी बढ़ाने की क्षमता है, को एक हार्सपावर वाले दो एरेटरर्स/पांच हार्स पावर वाले एक डीजल पम्प हेतु रू० 50,000/- की परियोजना लागत पर 25% अर्थात रू० 12,500/- तक शासकीय अनुदान दिये जाने की व्यवस्था है। एक हेक्टेयर जलक्षेत्र के लिए अधिकतम दो 1 एच पी एरेटर/एक 5 एच पी डीजल पम्प स्वीकार्य है।

4.6 मछली पालन तकनीक से सम्बन्धित अल्पकालीन प्रशिक्षण :-

तालाब से मछली का अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए मत्स्य पालकों को मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीक की जानकारी नितान्त आवश्यक है। प्रत्येक जनपद में स्थापित मत्स्य पालक विकास अभिकरण द्वारा मत्स्य पालकों को 10 दिन का अल्पकालीन प्रशिक्षण भी दिया जाता है तथ्ज्ञा इस प्रशिक्षण अवधि में रू० 100/- प्रतिदिन की दर से प्रशिक्षण भत्ता एवं रू० 100/- एक मुश्त भ्रमण व्यय भी दिये जाने की व्यवस्था है।

4.7 मत्स्य बीज की आपूर्ति :-

तालाब में ऐसी उत्तम मत्स्य प्रजातियों के शुद्ध बीज का संचय सुनिश्चित किया जाना चाहिए जो‍कि एक ही जलाशय वातावरण में रहकर एक दूसरे को क्षति न पहुंचाते हुए तालाब की विभिन्न सतहों पर उपलब्ध भोजन का उपभोग करें तथा तीव्रगति से बढ़ें। भारतीय मेजर कार्प मछलियों में कतला, रोहू एवं नैन तथा विदेश कार्प मछलियों में सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प एवं कामन कार्प का मिश्रित पालन विशेष लाभकारी होता है। उत्तम मत्स्य प्रजातियों का शुद्ध बीज, मत्स्य पालन की आधारभूत आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम की हैचरियों तथा मत्स्य विभाग के प्रक्षेत्रों पर उत्पादित बीज की आपूर्ति मत्स्य पालकों को आक्सीजन पैकिंग में तालाब तक निर्धारित सरकारी दरों पर की जाती है। उत्तर प्रदेश को मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र में मांग के अनुसार आत्म निर्भर बनाने के उद्देश्य से मत्स्य बीज उत्पादन के निजीकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है तथा निजी क्षेत्र में 10 मिलियन क्षमता वाली एक मिनी मत्स्य बीज हैचरी की स्थापना के लिए रू० 8.00 लाख तक बैंक ऋण व इस पर 10% शासकीय अनुदान की सुविधा अनुमन्य है। मत्स्य पालक निजी क्षेत्रों में स्थापित छोटे आकार की हैचरियों से भी शुद्ध बीज प्राप्त कर सकते हैं।

4.8 मिट्टी-पानी की जांच :-

मछली की अधिक पैदावार के लिए तालब की मिट्टी व पानी का उपयुक्त होना परम आवश्यक है। मंडल स्तर पर मत्स्य विभाग की प्रयोगशालाओं द्वारा मत्स्य पालकों के तालाबों की मिट्टी-पानी की नि:शुल्क जांच की जाती है तथा वैज्ञानिक विधि से मत्स्य पालन करने के लिए तकनीकी सलाह दी जाती है। वर्तमान में मत्स्य विभाग की 12 प्रयोगशालाये कार्यरत हैं। केन्द्रीय प्रयोगशाला मत्स्य निदेशालय, 7 फैजाबाद रोड, लखनऊ में स्थित है। शेष 11 प्रयोगशालायें फैजाबाद, गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़, मिर्जापुर, इलाहाबार, झाँसी, आगरा, बरेली, मेरठ मंडलों में उपनिदेशक मत्स्य के अन्तर्गत तथा जौनपुर जनपद में गूजरताल मत्स्य प्रक्षेत्र पर कार्यरत हैं।

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