उत्तर प्रदेश सरकार
सामान्य तौर पर पूछी जाने वाली प्रश्नावली

प्रश्न 1. मत्स्य पालन क्यों करें ?

उत्तर

जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में खाद्यानों के उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि नहीं हो रही है। दूध, घी की की कमी के कारण हमारे भोजन में मछली की विशेष उपयोगिता है। मीठे पानी की मछली में वसा बहुत कम होती है और इसकी प्रोटीन शीघ्र पचने वाली होती है। आधुनिक शोधों ने यह सिद्ध किया है कि अन्य प्रकार का मांस खाने वालों की अपेक्षा मछली खाने वालों को दिल की बीमारी कम होती है क्योंकि यह खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करती है। मछली में 14-25 प्रतिशत प्रोटीन के अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेड, खनिज, लवण, कैल्शियम, फासफोरस, लोहा आदि तत्व भी होते हैं।

प्रश्न 2. मछली पालन हेतु जानकारी कहाँ से मिलती है ?

उत्तर

मछली पालन हेतु जानकारी प्राप्त करने हेतु जनपद में स्थित सहायक निदेशक मत्स्य/मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पालक विकास अभिकरण के कार्यालय से सम्पर्क किया जा सकता है। साथ ही मण्डल के मण्डलीय उप निदेशक मत्स्य कार्यालय से भी सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

प्रश्न 3. मत्स्य पालन हेतु तालाब तैयारी का उचित समय क्या है ?

उत्तर

मत्स्य पालन प्रारम्भ करने से पूर्व अप्रैल, मई एवं जून माह में तालाब मत्स्य पालन हेतु तैयार किया जाता है।

प्रश्न 4. मछली पालन में कौन-कौन सी मछलियां पाली जाती है ?

उत्तर

मछली पालन में मुख्य रूप से 6 प्रकार की मछलियां पाली जाती हैं यथा- भारतीय मेजर कार्प में रोहू, कतला, मृगल (नैन) एवं विदेशी मेजर कार्प में सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प तथा कामन कार्प मुख्य है।

प्रश्न 5. मछली पालन हेतु बीज कहाँ से प्राप्त होता है ?

उत्तर

मछली पालन हेतु बीज प्राप्त करने हेतु जनपद के मत्स्य पालक विकास अभिकरण से सम्पर्क किया जा सकता है। जहाँ से मत्स्य बीज का पैसा जमा कराने पर अभिकरण द्वारा मत्स्य विकास निगम की हैचरी से मत्स्य बीज प्राप्त कर मत्स्य पालक के तालाब में डाला जाता है। इसके अतिरिक्त मत्स्य पालक जनपदीय कार्यालय में मत्स्य बीज का पैसा जमा कराकर सीधे निगम की हैचरी से अपने साधन से मत्स्य बीज तालाब में डाल सकता है।

प्रश्न 6. क्या मछली पालन हेतु मत्स्य विभाग से कोई ऋण दिया जाता है ?

उत्तर

नहीं, अपितु मछली पालन हेतु तालाब निर्माण, बंधों की मरम्मत, पूरक आहार, आदि मदों हेतु विभाग द्वारा बैंक से ऋण हेतु प्रस्ताव तैयार कराकर प्रेषित किया जाता है।

प्रश्न 7. क्या ऋण पर कोई अनुदान भी दिया जाता है ?

उत्तर

बैंक द्वारा स्वीकृत किये गये ऋण की धनराशि हेतु सामान्य जातियों को 20 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के मत्स्य पालकों को 25 प्रतिशत विभाग द्वारा सरकारी अनुदान दिया जाता है।

प्रश्न 8. क्या मछलियों में बीमारी भी लगती है ?

उत्तर

मछलियों में मुख्यत: फफूंद, जीवाणुओं, प्रोटोजोआ परजीवियों, कृमियों, हिरूडिनिया आदि द्वारा बीमारी उत्पन्न होती है जिसके निदान हेतु जनपदीय कार्यालय में सम्पर्क कर अधिकारियों/ कर्मचारियों से तकनीकी जानकारी प्राप्त कर उसके उपचार करना चाहिए।

प्रश्न 9. क्या मछली पालन हेतु मिट्टी पानी की जांच भी होती है ?

उत्तर

मछली पालन हेतु मिट्टी एवं पानी की जांच होती है जिसके लिए मत्स्य पालक जनपद के मत्स्य पालक विकास अभिकरण के कार्यालय में मिट्टी एवं पानी के नमूने उपलब्ध कराकर मिट्टी, पानी की नि:शुल्क जांच करा सकते हैं ताकि जांच के आधार पर अधिकारी/ कर्मचारी से तकनीकी सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 10. मत्स्य आहार की समयावधि क्या होनी चाहिए ?

उत्तर

मत्स्य आहार की अवधि जुलाई से नवम्बर एवं फरवरी से शिकारमाही के पूर्व तक होनी चाहिए।

प्रश्न 11. मछलियों को आहार देने का क्या समय होना चाहिए ?

उत्तर

मत्स्य आहार का समय निर्धारण सुबह या शाम को करना चाहिए व एक निश्चित समय पर ही उन्हें आहार देना चाहिए।

प्रश्न 12. मत्स्य आहार कितने प्रकार के होते हैं ?

उत्तर

मत्स्य आहार दो तरह के होते हैं (1) फार्म्युलेटेड मत्स्य आहार (2) स्वयं का तैयार किया हुआ। फार्म्युलेटेड मत्स्य आहार यू०पी० एग्रो एवं मत्स्य जीवी सहकारी संघ द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। फार्म्युलेटेड आहार उपलब्ध न होने पर चावल का कना और सरसों की खली का मिश्रण तैयार कर मत्स्य आहार स्वयं तैयार किया जा सकता है।

प्रश्न 13. मछलियों को आहार किस प्रकार देना चाहिए ?

उत्तर

मत्स्य आहार को टोकरी में तालाब के चारों किनारे व बीच में पानी की सतह पर रखना चाहिए। यदि आहार का उपभोग कम हो तो यह जांच करनी चाहिए कि मछलियां किसी बीमारी से पीड़ित तो नहीं हैं।

प्रश्न 14. मत्स्य पालन कौन-कौन कर सकता है ?

उत्तर

कोई भी इच्छुक व्यक्ति जिसके पास निजी भूमि या तालाब अथवा पट्टे का तालाब हो मत्स्य पालन कर सकता है। विभाग द्वारा सुविधायें प्राप्त करने के लिए इच्छुक व्यक्ति मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य पालक विकास अभिकरण से सम्पर्क कर सकते हैं।

प्रश्न 15. मत्स्य पालन करने के लिए विभाग द्वारा किन-किन व्यक्तियों को सहायता मिलती है ?

उत्तर

मत्स्य पालन हेतु किसी भी इच्छुक व्यक्ति को सहायता प्रदान की जाती है।

प्रश्न 16. मत्स्य पालन हेतु पट्टा आवंटन में किसे वरीयता दी जाती है ?

उत्तर

मत्स्य पालन हेतु पट्टा आवंटन में मछुआ समुदाय के लोगों को वरीयता दी जाती है।

 

प्रश्न 17. ग्राम सभा का पट्टा कैसे आवंटन होता है ?

उत्तर

ग्राम सभा का पट्टा आवंटन हेतु ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव तैयार कर तहसीदार/ उप जिलाधिकारी को प्रेषित किया जाता है जिनके द्वारा पट्टा निर्गमन की तैयारी की जाती है।

प्रश्न 18. पट्टा धारक को आर्थिक सहायता/ऋण कहां से प्राप्त हो सकता है ?

उत्तर

पट्टाधारक जनपद स्तरीय मत्स्य कार्यालय में सम्पर्क कर सकते हैं जिसके द्वारा ऋण हेतु प्रस्ताव बैंक को प्रेषित किया जाता है।

प्रश्न 19. मत्स्य पालन के लिए क्या आर्थिक सहायता विभाग द्वारा दी जाती है ?

उत्तर

नये तालाब निर्माण एवं प्रथम बार के उत्पादन निवेश हेतु 20 प्रतिशत की दर से अधिकतम रू० 40,000/- एवं रू० 6,000/- प्रति हेक्टेयर क्रमश: तथा अनुसूचित एवं जनजाति के व्यक्तियों के लिए 25 प्रतिशत की दर से अधिकतम रू० 50,000/- एवं 7,500/- प्रति हेक्टेयर क्रमश: का शासकीय अनुदान अनुमन्य है।

प्रश्न 20. मत्स्य संचय का उपयुक्त समय क्या होता है ?

उत्तर

भारतीय मेजर कार्प के मत्स्य बीज हेतु माह जुलाई से सितम्बर तक का समय मत्स्य संचय हेतु उपयुक्त होता है। कामन कार्प का मत्स्य बीज मार्च/अप्रैल में संचित किया जाता है।

प्रश्न 21. मछलियों को कितना मत्स्य आहार देना चाहिए ?

उत्तर

मछलियों को उनके शारीरिक वजन के 2-3 प्रतिशत अनुपात में मत्स्य आहार देना चाहिए।

प्रश्न 22. तालाब की सफाई कब और कैसे करनी चाहिए ?

उत्तर

तालाब की सफाई संचय के पूर्व अप्रैल या मई माह में करनी चाहिए। तालाब की सफाई हेतु ट्रैक्टर से अच्छी तरह जुताई करके चूना या गोबर की खाद डालने के 15 दिन बाद पानी भरकर तथा उसके 15 दिन बाद मत्स्य संचय करना चाहिए।

प्रश्न 23. तालाब से पानी की निकासी कब करनी चाहिए ?

उत्तर

तालाब से पानी की निकासी बरसात में गंदा पानी या सीवर का पानी आ जाने पर अथवा मछलियों के रोग ग्रसित होने पर की जानी चाहिए।

प्रश्न 24. यदि तालाब में मछली मर जाय तो क्या करें ?

उत्तर

यदि तालाब में मछली मर जाय तो उसे जला देना चाहिए अथवा जमीन में गाड़ देना चाहिए। ऐसी मछली को बाजार में विक्रय हेतु कभी नहीं ले जाना चाहिए।

प्रश्न 25. एक हेक्टेयर तालाब में कितना मत्स्य बीज संचय किया जाना चाहिए ?

उत्तर

25-50 मि०मी० आकार के 10 हजार से 15 हजार मत्स्य बीज प्रति हेक्टेयर संचय किया जाना चाहिए।

प्रश्न 26. कौन सी मछली पालन हेतु प्रतिबन्धित है और क्यों ?

उत्तर

उत्तर

प्रदेश में थाई मांगुर का पालन प्रतिबन्धित है क्योंकि मांसाहारी होने के कारण तालाब में पाली गयी मछलियों को नुकसान पहुंचाती है।

प्रश्न 27. विभाग द्वारा मत्स्य पालन हेतु क्या प्रशिक्षण दिया जाता है ?

उत्तर

विभाग द्वारा मत्स्य पालन, मत्स्य बीज संचय, रखरखाव मत्स्य पालन में अपनायी जा रही नवीनतम तकनीकों एवं विपणन आदि पर विस्तृत जानकारी 10 दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान दी जाती है।

प्रश्न 28. क्या प्रशिक्षण के दौरान किसी प्रकार की आर्थिक सहायता का प्राविधान है ?

उत्तर

मछली पालन हेतु प्रत्येक जनपद के मत्स्य पालक विकास अभिकरण द्वारा प्रशिक्षणार्थी को रू० 100/- प्रशिक्षण भत्ता प्रति दिन तथा एक मुश्त रू० 100/- भ्रमण भत्ता विभाग की ओर से दिया जाता है।

प्रश्न 29. प्रदेश में कौन-कौन से उपलब्ध जलक्षेत्र हैं और उनका क्षेत्रफल क्या है ?

उत्तर

उत्तर

प्रदेश में उपलब्ध जल संसाधन बहता हुआ पानी जैसे नदियां/नहरें 28500 कि०मी० एवं बंधा हुआ पानी जैसे मानव निर्मित बृहद एवं मध्यमाकार जलाशय 1.38 लाख हे०, प्राकृतिक झीलें 1.33 लाख हे० एवं ग्रामीण अंचलों में स्थित तालाब 1.61 लाख हे० हैं।

प्रश्न 30. संचय के समय क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?

उत्तर

मत्स्य बीज संचय के समय आक्सीजन पैक से भरे बीज को तालाब में कुछ देर के लिए छोड़ देना चाहिए ताकि पैक का तापमान तालाब के जल के तापमान के अनुरूप हो जाय ताकि मत्स्य बीज को तापमान में अंतर के कारण नुकसान न हो। संचय धूप में नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 31. मत्स्य पालन के लिए कौन-सी मिट्टी उपयुक्त है ?

उत्तर

चिकनी मिट्टी वाली भूमि के तालाब में मत्स्य पालन सर्वथा उपयुक्त होता है। इस मिट्टी में जलधारण क्षमता अधिक होती है। मिट्टी की पी-एच 6.5-8.0, आर्गेनिक कार्बन 1 प्रतिशत तथा मिट्टी में रेत 40 प्रतिशत, सिल्ट 30 प्रतिशत व क्ले 30 प्रतिशत होना चाहिए।

प्रश्न 32. मत्स्य पालन हेतु विपणन की क्या व्यवस्था है ?

उत्तर

मत्स्य पालकों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाने हेतु प्रदेश के पांच जनपदों गोरखपुर, गाजियाबाद, इलाहाबार, बरेली तथा लखनऊ में मत्स्य विपणन इकाईयों की स्थापना की गयी है। थोक विक्रय हेतु मण्डी परिषद द्वारा दुकानों की व्यवस्था, फुटकर बिक्री हेतु नगर निगम के माध्यम से कियोस्क एवं नागरिकों को मछली उपलब्ध कराने हेतु साइकिल एवं आइस बाक्स के माध्यम से बिक्री की व्यवस्था है।

प्रश्न 33. मत्स्य पालन के साथ और कौन-कौन से कार्य किये जा सकते हैं ?

उत्तर

समन्वित मत्स्य पालन योजनान्तर्गत बत्तख, पशु, सूकर आदि पालन किया जा सकता है जिसके साथ ही बन्धों पर पपीता, केला, सागभाजी भी उगाये जा सकते हैं जिससे बन्धें मजबूत होते हैं और अतिरिक्त आय भी होती है।

प्रश्न 34. मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए किन अन्य उपकरणों का उपयोग किया जा सकता है ?

उत्तर

मत्स्य उत्पादकता को बढ़ाने हेतु ऐरेटर स्थापित किया जा सकता है। ऐरेटर स्थापित करने हेतु एक हे० जलक्षेत्र के लिए रू० 50,000/- प्रति यूनिट एक हार्सपावर के दो ऐरेटर/एक पांच हार्सपावर का डीजल पम्प की वित्तीय सहायता विभाग द्वारा प्रदान की जाती है तथा अधिकतम रू० 12,500/- प्रति सेट हेतु शासकीय अनुदान अनुमन्य है।

प्रश्न 35. मत्स्य विभाग के तालाबों की नीलामी की क्या व्यवस्था होती है ?

उत्तर

विभागीय श्रेणी 4 के तालाबों की नीलामी जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा की जाती है जिसमें विभाग के जनपदीय अधिकारी सदस्य होते हैं। श्रेणी-2 एवं 3 के जलाशयों की नीलामी मण्डल स्तर पर संयुक्त विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा की जाती है।

प्रश्न 36. मत्स्य पालन हेतु मत्स्य बीज किस अनुपात में संचित करना चाहिए ?

उत्तर

मत्स्य पालन हेतु मत्स्य बीज संचय दो प्रकार किया जाता है। यदि केवल भारतीय मेजर कार्प का संचय किया जाना हो तो कतला 40 प्रतिशत, रोहू 30 प्रतिशत एवं नैन 30 प्रतिशत के अनुपात में तथा यदि भारतीय मेजर कार्प के साथ विदेशी कार्प मछलियों का संचय किया जाना हो तो कतला 30 प्रतिशत, रोहू 30 प्रतिशत, नैन 20 प्रतिशत एवं विदेशी कार्प 20 प्रतिशत का अनुपात रखा जाता है।

प्रश्न 37. जिल तालाबों को सुखाया नहीं जा सकता उसकी तैयारी कैसे करें ?

उत्तर

मौजूदा तालाबों में मत्स्य पालन करने से पूर्व अवांछनीय वनस्पति एवं मछलियों की निकासी आवश्यक है। वनस्पतियां हाथ से तथा मछलियां 25 कुन्तल प्रति हेक्टेयर प्रति मीटर पानी की गहराई की दर से महुआ की खली का प्रयोग कर अथवा बार-बार जाल चलाकर निकाली जा सकती हैं।