उत्तर प्रदेश सरकार
पूरक आहार

पूरक आहार

मछली की अधिक पैदावार के लिए यह आवश्यक है कि पूरक आहार दिया जाय। आहार ऐसा होना चाहिए जो कि प्राकृतिक आहार की भांति पोषक तत्वों से परिपूर्ण हो। साधारणत: प्रोटीनयुक्त कम खर्चीले पूरक आहारों का उपयोग किया जाना चाहिए। मूंगफली, सरसों, नारियल या तिल की महीन पिसी हुई खली और चावल का कना या गेहूं का चोकर बराबर मात्रा में मिलाकर मछलियों के कुल भार का 1-2 प्रतिशत तक प्रतिदिन दिया जाना चाहिए। मछलियों के औसत वजन का अनुमान 15-15 दिन बाद जाल चलवाकर कुछ मछलियों को तौलकर किया जा सकता है। यदि ग्रास कार्प मछली का पालन किया जा रहा हो तो जलीय वनस्पति जैसे लेमना, हाइड्रिला, नाजाज, सिरेटोफाइलम आदि व स्थलीय वनस्पति जैसे नैपियर, वरसीम व मक्का के पत्ते इत्यादि जितना भी वह खा सके, प्रतिदिन देना चाहिए। पूरक आहार निश्चित समय व स्थान पर दिया जाय तथा जब पहले दिया गया आहार मछलियों द्वारा खा लिया गया हो तब पुन: पूरक आहार दें। उपयोग के अनुसार मात्रा घटाई-बढ़ाई जा सकती है। पूरक आहार बांस द्वारा लटकाये गये थालों या ट्रे में रखकर दिया जा सकता है। यदि पूरक आहार के प्रयोग स्वरूप पानी की सतह पर काई की परत उत्पन्न हो जाय तो आहार का प्रयोग कुछ समय के लिए रोक देना चाहिए क्योंकि तालाब के पानी में घुलित आक्सीजन में कमी व मछलियों के मरने की सम्भावना हो सकती है।