उत्तर प्रदेश सरकार
प्रशिक्षण और प्रसार के मैनुअल 3

9. मत्स्य उत्पादन तथा मत्स्य पालन का प्रति हे० वार्षिक आय-व्यय विवरण :-

क. मत्स्य पालन पर वार्षिक व्यय धनराशि रू०
1 तालाब का किराया या पट्टे का लगान 1000
2 पानी की व्यवस्था 5000
3 जलीय पौधों व अवांछनीय मछलियों की सफाई 1500
4 चूने का प्रयोग (250 कि०ग्रा०) 1000
5 गोबर की खाद (10 टन) 2000
6 मत्स्य बीज व यातायात पर व्यय 1200
7 एन.पी.के. खाद का प्रयोग (200 कि०ग्रा०) 2000
8 पूरक आहार पर व्यय (10 कुंटल सरसों की खली व 10 कुंटल चावल का कना) 12000
9 मछलियों की देखभाल 3000
10 अन्य विविध व्यय 1300
 

योग :-

30,000
 

ख. मत्स्य उत्पादन व प्रत्याशित आय -

 
1 3000 कि०ग्रा० मत्स्य उत्पादन के रू० 35/- प्रति कि०ग्रा० की दर से विक्रय स्वरूप वार्षिक आय
(प्रदेश में तालाबों की औसत मत्स्य उत्पादकता 2700 कि०ग्रा०/हे०/वर्ष है परन्तु कई स्थानों पर मत्स्य पालकों द्वारा 4000 क्रि०ग्रा०/हे०/वर्ष से भी अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा रहा है। वैज्ञानिक विधि से मत्स्य पालन के फल्स्वरूप 3000 कि०ग्रा०/हे०/वर्ष उत्पादन सुगमता से संभव है।)
1,05,000
2 शुद्ध लाभ : वार्षिक आय-व्यय
1,05,000 - 30,000
75,000
     
ग. 1. बैंक ऋण किश्त की अदायगी पर व्यय 20,000
  2. मत्स्य पालक के जीविकोपार्जन हेतु उपलब्ध शुद्ध धनराशि 55,000

इस प्रकार एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के पुराने तालाब सुधारोपरान्त आवश्यक व्यवस्थायें अपनाते हुए मछली पालन करने से खर्ची तथा बैंक ऋण की किश्त के भुगतान को निकाल कर एक वर्ष में य० 55,000 की शुद्ध धनराशि प्राप्त किया जाना संभव है जोकि जीविकोपार्जन में काफी सहायक सिद्ध हो सकती है। मछली पालन निश्चित ही रोजी-रोटी का एक अच्छा साधन है। इसमें लागत कम और आय अधिक है।

मीठे जल में महाझींगा पालन सम्बन्धी माडेल परियोजना

1. प्रस्तावना :-

उत्तर प्रदेश में वर्तमान समय तक तालाबों में मत्स्य पालन कार्यक्रम मुख्यत: कार्प मछलियों (भारतीय मेजर कार्प मछलियों में कतला, रोहू तथा नैन एवं विदेशी कार्प मछलियों में सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प व कामन कार्प) के पालन तक सीमित रहा है और विभिन्न मत्स्य प्रजातियों के मिश्रित पालन के फलस्वरूप एक हेक्टेयर जल क्षेत्र के तालाब से एक वर्ष में 3000-4000 कि०ग्रा० (एक एकड़ में 1200 से 1600 कि०ग्रा०) तक मछली का उत्पादन सुनिश्चित किये जाने की पर्याप्त सम्भावनायें है। मछली पालन, रोजी-रोटी का एक महत्वपूर्ण साध है और आज के विकाशील युग में यह नितान्त आवश्यक है कि विभिन्न खाद्य पदार्थों के उत्पादन हेतु प्रत्येक संसाधन का समुचित दोहन सुनिश्चित किया जाये।

मीठे पानी का महा झींगा (मेक्रोब्रेक्रियम रोजनबर्गाई) जिसे जायन्ट फ्रेशवाटर प्रॉन कहते हैं, उत्तर प्रदेश की जलवायु को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश में मार्च से नवम्बर तक की अवधि में पाला जा सकता है। यह महाझींगा पानी में नीचे अथवा किनारों पर रेंगने वाला सर्वभक्षी जीव होता है। तालाब में मछली के साथ यदि झींगा पालन भी किया जाय तो मत्स्य पालक विशेष रूप से लाभान्वित हो सकते हैं।

2. महाझींगा के विषय में आवश्यक जानकारी :-

महाझींगा (जायन्ट फ्रेश वाटर प्रॉन) का अधिकतम भार यद्यपि 400 ग्राम तक देखा गया है परन्तु 40-50 ग्राम तक भार का झींगा बाजार में विक्रय हेतु उपयुक्त माना गया है। 6-7 माह की पालन अवधि में झींगे का औसत भार 40 ग्राम तक सुगमतापूर्वक प्राप्त किया जाना सम्भव है। महाझींगा रात्रिचर होता है और इस प्रकार रात्रिकाल में यह अधिक सक्रिय होता है। इस प्रजाति में स्वाजातिभोजी प्रवृत्ति भी होती है और खाद्य पदार्थ उपलब्ध न होने पर बड़े झींगे छोटे झींगों को खा जाते हैं। वैसे जलीय कीड़े-मकोड़े क्रस्टेशियन लार्वा तथा छोटे-छोटे घोंघे आदि महाझींगा का प्राकृतिक भोजन होते हैं। मछली पालन के साथ झींगा पालन मत्स्यकी विकास के परिप्रेक्ष्य में एक नया कीर्तिमान सिद्ध हो सकता है तथा अधिक लाभ अर्जन की दृष्टि से इस कार्यक्रम की अपनी पृथक उपयोगिता हो सकती है।

3. झींगा पालन हेतु पर्यावरण :-

ऐसे तालाब जो मछली के लिए उपयुक्त होते हैं, झींगा पालन के लिए भी उपयुक्त होते हैं। झींगा पालन हेतु लगभग 0.4 हेक्टेयर (एक एकड़) क्षेत्रफल के आयताकार तालाब अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त होते हैं। तालाब की मिट्टी की पी-एच 6.5-7.5, रेत 40 प्रतिशत, क्ले 30 प्रतिशत तथा सिल्ट 30 प्रतिशत उपयुक्त होती है। महाझींगा की वृद्धि हेतु जलीय तापमान यद्यपि 28-32 डि० सें० अधिक उपयुक्त होता है, अपितु सामान्य तौर पर 18-34 डि० सें० तापमान झींगा पालन के लिए वांछनीय है। 18 डि०सें० से कम जल का तापमान झींगा के जीवन के लिए घातक होता है। विशेष ध्यान देने योग्य है कि जिस तालाब में झींगा पालन किया जा रहा हो, उसके पानी में सामान्यत: घुलित आक्सीजन 5 मि०ग्रा०/ ली०, पी- एच 7.5-8.5, कुल क्षरीयता 150-250 मि०ग्रा०/ ली०, क्लोराइड्स 30-50 मि०ग्रा०/ ली०, कुल कठोरता 50-150 मि०ग्रा०/ली०, तथा कुल घुलित ठोस पदार्थ 300 मि०ग्रा०/ ली० होना चाहिए। घुलित आक्सीजन का वांछित स्तर बनाये रखने के लिए तालाब में ताजे पानी की आपूर्ति व्यवस्था या एरेटर की व्यवस्था आवश्यक होती है।

4. तालाब प्रबन्ध व्यवस्था :-

तालाबों में मछली के साथ महाझींगा पालन करने के लिए यह उचित होगा कि पानी की निचली सतह पर निवास करने वाली कार्प मत्स्‍य प्रजातियों (सइप्रिन्स कार्पियों व सिरहाना मृगला) की संख्या में कमी करके जायन्ट फ्रेशवाटर प्रान का संचय किया जाय। एक एकड़ क्षेत्रफल के तालाब में झींगा संवर्धन हेतु उपयुक्त जलीय पर्यावरण के सुनिश्चिय की दृष्टि से सामान्यत: 80 कि०ग्रा० चूने का प्रयोग, 40 कि०ग्रा० सिंगिल सुपरफास्फेट तथा 10 कि०ग्रा० यूरिया का प्रयोग उपयुक्त होता है। विशेषकर पानी की ऊपरी सतह तथा मध्य सतह पर रहने वाली कतला, सिल्वर कार्प व रोहू तथा ग्रास कार्प मछलियों की 2800 अंगुलिकाओं के साथ 10,000 झींगा बीज संचित किया जा सकता है। झींगा के लिए अतिरिक्त कृत्रिम आहार जिसमें 28-30 प्रतिशत प्रोटीन (50 प्रतिशत जन्तु तथा 50 प्रतिशत वनस्पति साधन में) हो, की व्यवस्था की जानी चाहिए।

5. महाझींगा का बीज :-

मैक्रोब्रेकियम रोजनबर्गाई (जायन्ट फ्रेश वाटर प्रान) के प्रजनन आदि के परिप्रेक्ष्य में 12-18 पी०पी०टी० खारे पानी की आवश्यकता होती है। इसका प्रजनन सागरतटीय प्रदेशों उदाहरणार्थ तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, उड़ीसा व पश्चिम बंगाल में होता है जहां से प्रान बीज उत्तर प्रदेश में आयातित किया जा सकता है।

6. झींगा उत्पादन :-

मत्स्य सह झींगा पालन अर्थात पालीकल्चर सिस्टम में वैज्ञानिक आधार पर सुनियोजित रूप से पालन स्वरूप एक एकड़ के तालाब से 12 कि०ग्रा० मछली के उत्पादन के अतिरिक्त 200 कि०ग्रा० महाझींगा का उत्पादन भी प्राप्त किया जा सकता है जो निश्चित आय का एक उत्तम स्रोत हो सकता है।

7. विपणन :-

तालाब से झींगा बाहर निकालने के बाद इसे तत्काल बर्फ में रखा जाना चाहिए क्योंकि यह अतिशीघ्र नष्ट होने वाला खाद्य पदार्थ है। निर्यातकों अथवा बड़े शहरों में होटलों आदि में सम्पर्क करते हुए झींगा के विपणन की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

एक एकड़ जलक्षेत्र में मीठे पानी के महाझींगा पालन की आर्थिकी

1. व्यय धनराशि (रू०)
1.1 तालाब में चूने का प्रयोग 80 कि०ग्रा०@ रू० 3/- प्रति कि०ग्रा० 240
1.2 सिंगिल सुपर फास्फेट 40 कि०ग्रा० तथा यूरिया 10 कि०ग्रा० 200
1.3 10,000 जायन्ट फ्रेशवाटर प्रान बीज का मूल्य यातायात सहित @ रू० 1200/- प्रति हजार बीज 12,000
1.4 प्रान फीड पर व्यय 200 कि०ग्रा० फीड @ रू० 26/- प्रति कि०ग्रा० 5,200
1.5 अन्य व्यय 360
  योग 18,000
उल्लेखनीय है कि झींगा पालन के लिए प्रथम बार निवेशों पर 20 % अनुदान भारत सरकार द्वारा अनुमोदित है।
2. प्रत्याशित झींगा उत्पादन :-
2.1 संचित संख्या 10,000
2.2 सर्वाइवल 50 प्रतिशत
2.3 हारवेस्टिंग के समय औसत भार 40 ग्राम
2.4 6-7 माह की पालन अवधि में झींगा उत्पादन 200 कि०ग्रा०
2.5 झींगा के विक्रय से आय विक्रय मूल्य रू० 200/- प्रति कि०ग्रा० रू० 40,000
 
3. शुद्धलाभ :-
आय - झींगा पालन पर किया गया व्यय
रू० 40,000 - रू० 18,000 = रू० 22,000/-
इस प्रकार एक एकड़ के तालाब में मछली के उत्पादन से पृथक झींगा पालन के फलस्वरूप रू० 22,000/- का अतिरिक्त शुद्धलाभ अर्जित किया जाना संभव है।

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